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स्वास्थ विभाग के दावे बेड से लुढ़ककर जमीन पर आ गिरे
August 12, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • Lucknow/UP News

लखनऊ । ज्यादा दिन नहीं बीते जब राजधानी के सरकारी, निजी अस्पताल अपनी बेड क्षमता, सुविधा का बड़ा बखान करते थे। कोरोना की चाल क्या बढ़ी, स्वास्थ महकमा और चिकित्सा संस्थान ही सिस्टम के संक्रमण के शिकार हो गए। सरकारी-निजी अस्पताल में बेड की क्षमता काफी है। बावजूद इसके अस्पतालों ने खुद पर से कोरोना मरीजों का बोझ घटाने के लिए बेडों का कोटा ही कम कर दिया। विभाग के दावे बेड से लुढ़ककर जमीन पर आ गिरे। लोहिया संस्थान का शहीद पथ स्थित अस्पताल 200 बेड क्षमता का है। इसे पहले घटाकर सौ बेड का दिखाया। कोविड मरीजों की भरमार होने पर बवाल बढ़ा तो 25 बेड ही बढ़ाकर पल्ला झाड़ लिया। वह भी तब जब सरकार ने कोविड के बेड बढ़ाने के आदेश दिए। वहीं 20 के करीब कक्षों में स्टाफ आराम फरमा रहा है। ऐसे ही केजीएमयू में बेड क्षमता 4400 है। कई विभागों में बेड खाली हैं, मगर कोरोना के लिए मरीजों के आइसोलेशन के 220 बेड ही आरक्षित हैं।

शहर में कोरोना मरीजों की संख्या 13 हजार पार कर चुकी है। प्रदेश भर से भी गंभीर मरीज रेफर किए जा रहे हैं। इस आस के साथ कि यहां केजीएमयू, पीजीआइ, लोहिया संस्थान में गंभीर मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। ये कोविड लेवल-3 के अस्पताल हैं। छह निजी मेडिकल कॉलेजों में भी मरीज भर्ती का बंदोबस्त किया गया है। अधिकतर लेवल-वन के अस्पताल व कोविड केयर सेंटर हैं। इनमें कुल 4800 के करीब बेड हैं। मगर, सरकारी-निजी अस्पताल में अति गंभीर मरीजों के लिए 600 व गंभीर मरीजों के लिए 1200 बेड ही हैं। ऐसे में अति गंभीर मरीजों को भर्ती के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

सरकारी में दस हजार बेड

सरकारी में एलोपैथ के चार बड़े चिकित्सा संस्थान, जिला अस्पताल सहित नौ बड़े हॉस्पिटल, 19 नगरीय-ग्रामीण सीएचसी व कुल 80 पीएचसी हैं। आयुष के तीन मेडिकल कॉलेज, 16 आयुर्वेद मिनी अस्पताल, एक यूनानी और 11 होम्योपैथ डिस्पेंसरी हैं। सभी में जोड़कर करीब 10 हजार बेड होते हैं। कुछ को ही कोविड अस्पताल बनाया, उनमें भी कोरोना का इलाज सीमित बेडों पर ही है।

निजी में 18 हजार बेड, सात अस्पताल में ही इलाज

सीएमओ दफ्तर में 2300 एलोपैथ क्लीनिक, अस्पताल दर्ज हैं। 950 नर्सिंग होम रजिस्टर्ड हैं। ये दस से लेकर सौ बेड क्षमता के हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में औसतन 18000 बेड होने का अनुमान है। लेकिन, सरकार के निर्देश के बाद भी महज दस अस्पताल ही कोविड पैनल में जुड़ सके हैं। इनमें भी सात नर्सिंग होम ही मरीजों को भर्ती कर रहे हैं।