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लंबी उम्र की ख्वाहिश होगी जल्द पूरी
August 5, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • health & mahila jagat/Fashion

नाति-पोतों के बच्चों को खिलाने की ख्वाहिश रखने वाले लोगों के लिए एक खुशखबरी है। दक्षिण कोरियाई वैज्ञानिकों ने केंचुए पर अध्ययन के दौरान ‘वीआरके-1’ और ‘एएमपीके’ नाम के दो ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जिनकी कार्य प्रणाली में मामूली बदलाव कर ढलती उम्र में पेश आने वाली समस्याओं को दूर किया जा सकता है। चूंकि, ये प्रोटीन मानव शरीर में भी पाए जाते हैं, लिहाजा इनकी मदद से इनसानों को भी लंबी उम्र की सौगात देने वाली दवाएं तैयार करना मुमकिन है।

कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (केएआईएसटी) के शोधकर्ताओं ने ‘कैनोरहैबडाइटिस एलिगन’ नस्ल के केचुओं को दो समूह में बांटा। पहले समूह में शामिल केंचुओं में ‘वीआरके-1’ और ‘एएमपीके’ प्रोटीन के उत्पादन की प्रक्रिया से कोई छेड़छाड़ नहीं की। वहीं, दूसरे समूह के केंचुओं की जेनेटिक संरचना में कुछ बदलाव किए, जिससे दोनों प्रोटीन ज्यादा मात्रा में पैदा हो सकें। इसके बाद दोनों समूह के केंचुओं से कड़ा शारीरिक श्रम करवाया, ताकि उनमें ऊर्जा का स्तर घटने लगे। 

शोधकर्ताओं ने देखा कि पहले समूह के केंचुए बुरी तरह से थककर चूर हो गए थे। जबकि दूसरे समूह के केंचुए जरा-सा भी थके हुए या सुस्त नहीं नजर आ रहे थे। ‘वीआरके-1’ और ‘एएमपीके’ का उत्पादन बढ़ना इसकी मुख्य वजह था। दरअसल, दोनों प्रोटीन ग्लूकोज के ऊर्जा में तब्दील होने की प्रक्रिया को रफ्तार देते हैं। इससे कोशिकाओं में ऊर्जा का स्तर बरकरार रखने में मदद मिलती है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल साइंस एडवांसेज’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

दो प्रोटीन का कमाल
1.वीआरके-1 : 
यह प्रोटीन कोशिकाओं में ऊर्जा के स्तर पर नजर रखता है। ऊर्जा के स्तर में जैसे ही कमी आने लगती है, वीआरके-1 प्रोटीन ‘एएमपीके’ को फॉस्फेट अणुओं से जुड़कर ग्लूकोज की खपत बढ़ाने का संदेश देता है।
2.एएमपीके : इस प्रोटीन के फॉस्फेट अणुओं से जुड़ने पर ग्लूकोज के ऊर्जा में तब्दील होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इससे कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन तो मिलती ही है, ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहता है।

असामयिक मौत का खतरा टलेगा
-मुख्य शोधकर्ता संगसून पार्क के मुताबिक ‘वीआरके-1’ और ‘एएमपीके’ प्रोटीन माइटोकॉन्ड्रिया (सूत्रकणिका) की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने में मददगार हैं। विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सूत्रकणिका की क्रिया का ढलती उम्र में होने वाली बीमारियों से सीधा संबंध है। इसमें कमी आने पर असामयिक मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

मानव कोशिकाओं पर सफल परीक्षण
-पार्क और उनके साथियों ने लैब में तैयार मानव कोशिकाओं में कुछ जेनेटिक बदलाव किए, ताकि उनमें ‘वीआरके-1’ और ‘एएमपीके’ का उत्पादन बढ़ जाए। इसके बाद जब कोशिकाओं को कठिन परिस्थिति में रखा गया तो भी उनमें ऊर्जा का स्तर बना रहा। पार्क को उम्मीद है कि यह खोज लंबी उम्र की सौगात देने वाली दवाओं के निर्माण की नींव रखेगी।