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खाने के शौकीन कर रहे बाहर खाने का इंतजार
July 27, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • National/Others

नई दिल्ली। बीसवीं सदी की महान साहित्यकार वर्जीनिया वुल्फ ने किसी अन्य समय और संदर्भ में कहा था, ''कोई तब तक सोच नहीं सकता, प्रेम नहीं कर सकता, सो नहीं सकता जबतक कि वह ठीक से खाना नहीं खाता।'' दशकों बाद जब कोविड-19 का प्रसार जारी है ये शब्द उन लोगों के लिए प्रासंगिक हो गए है जो सामान्य हालात होने पर कम से कम रेस्तरां में जाकर बढ़िया खाने की उम्मीद कर रहे हैं। 

गत महीनों में भारत के शहरी कुलीन वर्ग में बाहर जाकर खाने की परिपाटी में कमी आई है, लेकिन एक बार फिर यह स्थिति लौटने की उम्मीद है क्योंकि करीब चार महीने के बाद रेस्तरां उद्योग लोगों का फिर से स्वागत करने की तैयारी कर रहा हैं। 

कोरोना वायरस की महामारी के चलते खाद्य एवं पेय उद्योग खुद को परिवर्तित कर रहा है ताकि समय के साथ सामंजस्य बिठाया जा सके। धीमी ही गति से सही वह धीरे-धीरे इस संकट से खुद को बाहर निकाल रहे हैं, कई रेस्तरां ने ऑनलाइन ऑर्डर पर खाना पहुंचाने की शुरुआत की है और कई डिजिटल उपायों से स्वयं को पुर्नस्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। 

सामाजिक दूरी, खुली रसोईघर, नियमित तौर पर सैनिटाइजेशन, रेस्तरां कर्मियों से न्यूनतम संपर्क और डिजिटल मेन्यु कुछ उपाय हैं जो ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए अपनाए जा रहे हैं। मार्च महीने में कोविड-19 की वजह से लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद से ही घर में बैठकर उब चुकी शोभा मिश्रा उन लोगों में हैं जो अपनी पसंदीदा कॉफी और कुकीज की तलाश में घर से बाहर कुछ समय बिताने के लिए निकल रही हैं। 

मीडिया पेशेवर मिश्रा दक्षिण दिल्ली के अपने नियमित ठिकाने ब्लू टोकाई में जाने पर स्वच्छता और सामजिक दूरी का अतिरिक्त ख्याल रखती हैं। सामाजिक दूरी के नये नियम के बीच कैफे की टेबल पर क्यूआर कोड उनका ध्यान विशेष तौर पर आकर्षित करता है। उन्होंने कहा, '' यह राहत है कि कैफे में भीड़ नहीं है। इसके अलावा टेबल पर रखे क्यूआर कोड को फोन से स्कैन करते ही पूरा मेन्यु (व्यंजन सूची) सामने आ जाता है। 

गुरुग्राम में मानव संसाधन प्रबंधक के तौर पर काम करने वाली अंकिता वर्मा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि बाहर खाना खाने से अधिक बाहर जाकर खाने के अनुभव की कमी महसूस कर रही हैं। 

ब्लू टोकाई द्वारा डिजिटल मेन्यु का विचार अपना है लेकिन नये प्रौद्योगिकी समाधान मुहैया कराने वाले जैसे माई मैन्यु और फास्टर भी अपने ग्राहकों को बता रहे हैं कि कैसे बिना संपर्क किए क्यूआर कोड से खाने का ऑर्डर किया जा सकता है और भारतीय सेवा बाजार में उनकी मांग बढ़ रही है। रेस्तरां मालिक मान रहे हैं कि ये बदलाव ही मौजूदा परिस्थितियों में कारोबार को जारी रखने का तरीका है।

रेस्तरां के प्रत्येक टेबल पर मौजूद कंप्यूटर आधारित कोड से ग्राहक अपने स्मार्टफोन के जरिये मेन्यु देख सकता है और अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे खाना ऑर्डर करता सकता है, यहां तक कि खाना खाने के बाद बिल का भुगतान कर बिना किसी के संपर्क में आए बाहर आ सकता है। 

माई मेन्यु इंडिया के प्रमुख नीरन तिवारी ने ई्मेल के जरिये 'पीटीआई-भाषा से की गई बातचीत में कहा, '' रेस्तरां पहले ही इस बदलाव को अपनाना शुरू कर चुके हैं क्योंकि वे अपने कारोबार को जारी रखना चाहते हैं। वहीं, ग्राहक बाहर निकलने और सुरक्षित तरीके से खाना खाने के इच्छुक हैं। हमें न केवल पंच सितारा से ऑर्डर आ रहे हैं बल्कि मध्यम दर्जे के रेस्तरां भी संपर्क कर रहे हैं क्योंकि यह उनके यहां आने वाले ग्राहकों में भरोसा जगाएगा।