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हर साल 23 लाख रुपये की ऑक्सीजन देता है एक पेड़
June 5, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • health & mahila jagat/Fashion

पौधे अकूत संपदा के स्वामी हैं। एक वयस्क पौधा हर साल करोड़ों रुपए की ऑक्सीजन फ्री में देता है। ऑक्सीजन का अर्थशास्त्र हमें सोचने पर मजबूर करता है कि पौधे जीवन के लिए कितने उपयोगी है। विकास की दौड़ में कंक्रीट के जंगलों का दायरा बढ़ रहा है। प्राकृतिक जंगल का दायरा तेजी से सिमट रहा है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपा श्रीवास्तव ने बताया कि व्यक्ति हरियाली खत्म करने में जरा भी नहीं सोचता। यह हरे पौधे उसे कितना देते हैं इसका अंदाजा उसे नहीं है। एक वयस्क पेड़ रोजाना औसतन 230 लीटर ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है। इस दौरान वह वातावरण में मौजूद 48 पाउंड कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित भी करता है। वृक्ष के आसपास कचरा जलाते हैं तो इसकी ऑक्सीजन उत्सर्जित करने की क्षमता आधी हो जाती है। 

हर इंसान को चाहिए 550 लीटर ऑक्सीजन 
उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति को रोजाना 550 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसे वह सांस के जरिए लेता है। जो हवा कोई व्यक्ति अपने सांस के जरिए फेफड़ों में लेता है उसमें 20 फीसदी ऑक्सीजन होती है। ऐसे में हर व्यक्ति को जीवित रहने के लिए कम से कम तीन वयस्क पौधों की दरकार होती है। 

नीम, बरगद, तुलसी है जीवनदाता 
पीपल , नीम, बरगद और तुलसी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देते हैं। नीम, बरगद, तुलसी के पेड़ एक दिन में 20 घंटों से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। ऑक्सीजन बनाने का काम पेड़ की पत्तियां करती हैं। बताया जाता है कि पत्तियां एक घंटे में 5 मिलीलीटर ऑक्सीजन बनाती हैं। इसलिए जिस पेड़ में ज्यादा पत्तियां होती हैं, वे पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन बनाता है।

8500 रुपये में है 750 लीटर ऑक्सीजन
- विकास की अंधी दौड़ में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ऑक्सीजन का बाजार भी सजने लगा है। फ्री में मिलने वाली ऑक्सीजन अब मंहगे रेट में बाजार में मौजूद है। ऑनलाइन कंपनियां 8500 रुपये में 750 लीटर ऑक्सीजन का सिलेंडर मुहैया करा रही है। ऐसे में एक व्यक्ति सालभर में 23 लाख रुपये की ऑक्सीजन खरीदेगा।

अस्थमा की आशंका एक-तिहाई कम करते हैं 343 पेड़
एमएमएमयूटी के पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. गोविन्द पाण्डेय ने बताया कि एक वर्ग किमी में 343 पेड़ लगाने पर बच्चों में अस्थमा की आशंका एक-तिहाई कम हो जाती है। शहरों में अगर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं तो खराब पर्यावरण से होने वाली मौतों को नौ फीसदी तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अपने जीवनकाल में एक पेड़ मिट्‌टी से करीब 80 किलोग्राम पारा, लीथियम, लेड आदि जैसी जहरीली धातुओं को सोखता है। इससे मिट्‌टी ज्यादा उर्वरक और खेती लायक बनती है।