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छह महीने के बाद भी कोरोना वायरस के पांच रहस्य बरकरार
July 8, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • National/Others

नई दिल्ली I छह महीनों में एक करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं तथा पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन कोविड-19 के पांच रहस्यों से वैज्ञानिक आज भी पर्दा नहीं उठा सके हैं। साइंस जर्नल नेचर ने दुनिया के वैज्ञानिकों के हवाले से एक शोध रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कोविड के पांच तिलिस्मों का जिक्र है। रिपोर्ट कहती है कि जब तक इन पांच सवालों के जवाब नहीं मिलते, महामारी काबू में नहीं आ सकती।

पहला सवाल यह है कि वायरस के विरुद्ध मानव शरीर की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों है। बीमार और बूढ़ों को छोड़ भी दें, तो यह स्पष्ट हो चुका है कि एक ही उम्र, समान शारीरिक क्षमता के दो लोगों को वायरस संक्रमित करे, तो दोनों पर इसका प्रभाव अलग-अलग होता है। ऐसा क्यों होता है, यह आज भी पता नहीं है। वैज्ञानिकों की एक अन्तरराष्ट्रीय टीम ने इटली एवं स्पेन के 4000 लोगों के जीनोम का अध्ययन करने के बाद कहा है कि जिन लोगों पर वायरस का गंभीर प्रभाव हुआ, उनमें एक या दो अतिरिक्त जीन हो सकते हैं। जेनेटिक कारणों पर शोध जारी है।

दूसरे, संक्रमित होने के बाद कोविड के खिलाफ कब तक प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी। अन्य कोरोना वायरस के मामले में यह कुछ महीनों की ही पाई गई। इसलिए आज भी कोविड-19 के बाद संक्रमितों में उत्पन्न एंडीबॉडीज पर अध्ययन करके यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वे कितने समय तक बीमारी से प्रतिरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

तीसरा, दुनिया के किसी हिस्से में वायरस ज्यादा घातक और किसी हिस्से में कम घातक क्यों है? वायरस में बदलावों को लेकर कई अध्ययन हुए हैं जो छोटे बदलावों का संकेत तो करते हैं, लेकिन इन मामूली बदलावों से वायरस की कार्यप्रणाली कैसे बदल रही है और वह कैसे घातक हो रहा है, इसका पता नहीं चल रहा।

चौथा रहस्य इसके टीके को लेकर है। दुनिया में टीके के 200 प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिनमें 20 मानव परीक्षण के स्तर पर पहुंचे हैं, लेकिन इन टीकों के पशुओं पर परीक्षणों एवं मानव पर शुरुआती परीक्षणों से यही नतीजा निकलता है कि यह फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में कारगर है। यानि निमोनिया नहीं होगा, लेकिन बीमारी का संक्रमण टीके से नहीं रुकेगा। सबसे पहले ऑक्सफोर्ड का टीका आ सकता है, लेकिन सिर्फ वह फेफड़ों का संक्रमण बचा पाएगा।

पाचवां अनुत्तरित सवाल है कि वायरस आखिर आया कहां से। अभी तक यही मानते हैं कि यह चमगादड़ से आया क्योंकि एक कोरोना वायरस आरएटीजी 13 चमगादड़ से आया। कोविड और आरएटीजी के जीनोम संरचना 96 फीसदी मिलती है, लेकिन यदि यह चमगादड़ से सीधे इंसान में पहुंचा है, तो वायरस के जीनोम में चार फीसदी का अंतर नहीं हो सकता। चार फीसदी बदलाव में लंबा वक्त लगता है। इसलिए चमगादड़ से यह किसी दूसरे जानवर में गया और वहां से फिर इंसान में आया। बिलाव (सीविट) पर संदेह है, लेकिन साबित नहीं हुआ।