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अनेक मकानों का मालिक होता है ऐसा आदमी
June 8, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • aastha/Jyotish

यदि मस्तिष्क रेखा शाखान्वित हो तो पहले पैतृक घर में, फिर दूसरे घर में निवास करते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा दोनों हाथों में द्वि-शाखाकार हो तो मकान या संपत्ति की संख्‍या अधिक होती है। पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार अंगूठा छोटा और कम खुलने वाला हो, अंगुलियां टेढ़ी-मेढ़ी हों तो ऐसे व्यक्ति का निवास स्थान गंदी जगह पर होता है। यदि जीवन रेखा और मस्तिष्क दोनों दोषपूर्ण हों, अंगुलियां मोटी हों और अंगूठा कम खुलता हो तो इनके घर के पास गंदगी होती है और पड़ोसी भी अच्छे नहीं होते। हाथ पतला, काला, कठोर, ऊबड़-खाबड़ हो, अगूंठा छोटा और अंगुलियां मोटी हों तो ऐसे व्‍यक्‍तियों का घर भी अच्‍छी जगह नहीं होता। इनके घर पहुंचने वाली गली संकरी होती हैं।

यदि मस्तिष्क रेखा अंत में द्वि-शाखाकार हो, सूर्य और बृहस्पति की अंगुलियां तिरछी हों तो मकान का दरवाजा आबादी की ओर होता है। यदि मस्तिष्क रेखा अतं में द्वि-शाखाकार हो और शनि की अंगुली लंबी हो तो मकान का दरवाजा कम आबादी की ओर होता है। हाथ कठोर और निम्न स्तर का हो, अंगूठा कम खुलता हो तथा मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण हो तो निवास स्थान छोटा और गंदी जगह पर होता है। मस्तिष्क रेखा या उसकी शाखा चंद्रमा पर जाती हो तो मकान किसी जलाशय, कुए, बावडी, तालाब या नहर के पास होता है।

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)