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25 जुलाई को है नाग पंचमी, शुभ फल देता है बारह देवनागों का स्मरण
July 24, 2020 • जयंती एक्सप्रेस • aastha/Jyotish

भारतीय दर्शन सभी प्राणियों में परमात्मा के दर्शन कर उनमें एकता का अनुभव करता है- ‘समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम।’ इसी को ध्यान में रखकर नागों की पूजा भी शिवजी को सर्वाधिक प्रिय श्रावण माह में ही की जाती है। उनके गले में विराजमान हैं नागराज वासुकि, तो गणेश जी सर्प को ही जनेऊ की तरह धारण करते हैं। 25 जुलाई (शनिवार) को नागपंचमी है। राजस्थान आदि कई स्थानों में यह पर्व श्रावण कृष्णपक्ष में मनाया जाता है। 

अनंत, वासुकि, शेष,पद्मनाभ, कंबल, ककार्टक,अश्वतर, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक, कालिये और पिंगल इन 12 देव नागों का स्मरण अद्भुत फल प्रदान करता है। ‘ओम कुरुकुल्ये हंु फट् स्वाहा’ का जाप करना शुभ माना जाता है। साल के बारह महीनों इनमें से एक-एक नाग की पूजा करनी चाहिए। राहु और केतु आप की कुंडली में अगर नीच राशियों- वृश्चिक, वृष, धनु और मिथुन में हैं, तो अशुभ फलों से मुक्ति पाने के लिए अवश्य ही पूजा करें। नौ ग्रहों में अनंत नाग सूर्य, वासुकि चंद्रमा, तक्षक भौम, ककार्ेटक बुध, पद्म बृहस्पति, महापद्म शुक्र और कुलिक व शंखपाल शनि ग्रह के रूप हैं। भगवान कृष्ण की कुंडली देखने वाले गर्ग ऋषि ने शेषनाग से ही ज्योतिष विद्या सीखी थी। 

इस दिन घर के दरवाजे के दोनों ओर गोबर से नाग का चित्र बनाया जाता है। ऐसी कथा मिलती है कि मणिपुर में रह रहे एक किसान परिवार में एक पुत्री और दो पुत्र थे। खेत में हल जोतते समय हल के फन से नाग के तीन बच्चे मर गए। नागिन ने गुस्से में रात को किसान, उसकी पत्नी और दोनों लड़कों को डस लिया। अगले दिन सुबह किसान की पुत्री को डसने की इच्छा से नागिन फिर आई, तो किसान की पुत्री ने उसके सामने दूध का भरा कटोरा रख दिया। क्षमा मांगी। तब नागिन ने उसे वर देते हुए उसके माता-पिता और दोनों भाइयों को पुन: जीवित कर दिया और कहा कि जो आज के दिन नागों की पूजा करेगा, उसे नाग नहीं डसेंगे। यह घटना श्रावण शुक्ल पंचमी को घटी थी। तब से इस दिन नागों की पूजा की जाती है। नागों की पूजा से संतान भी प्राप्त होती है। लक्ष्मण और बलराम शेष नाग का ही अवतार माने जाते हैं।